रद्दीकरण और रिफंड
रद्द करने से पहले जान लीजिए कि रेलवे कितना काटेगा और आपके खाते में कितना लौटेगा — कन्फर्म, RAC, वेटिंग और तत्काल, सबके अलग नियम हैं।
इस श्रेणी का निश्चित शुल्क: ₹120 प्रति यात्री।
कन्फर्म टिकट के स्लैब
लोग अक्सर मानते हैं कि महँगी टिकट पर ज़्यादा कटता है। असल में सबसे बड़ा कारक यह है कि आप कब रद्द कर रहे हैं। प्रस्थान से 72 घंटे पहले तक केवल श्रेणी का निश्चित शुल्क लगता है, चाहे किराया कितना भी हो। उसके बाद हर स्लैब पर कटौती तेज़ी से बढ़ती है — 25%, फिर 50%, और आठ घंटे के भीतर पूरी रकम चली जाती है। यात्रा टलने का अंदेशा हो तो जल्दी रद्द करना ही सबसे सस्ता विकल्प है।
पूरी तरह वेटिंग रह गई ई-टिकट चार्ट बनते ही अपने आप रद्द हो जाती है और क्लर्केज (₹63 प्रति यात्री) काटकर बाक़ी रकम उसी खाते में लौट आती है। इसके लिए न TDR भरना पड़ता है, न कहीं आवेदन करना पड़ता है। चार्ट कब बनेगा, यह जानने के लिए चार्ट तैयारी कैलकुलेटर देखिए।
कन्फर्म तत्काल टिकट पर रद्दीकरण का कोई रिफंड नहीं मिलता। यह प्रीमियम के अलावा एक छिपी हुई लागत है, और तत्काल लेने से पहले इसे जोड़कर देखना चाहिए। हाँ, ट्रेन रद्द हो जाए या तीन घंटे से अधिक देर से चले, तो TDR के ज़रिये पूरा रिफंड माँगा जा सकता है।
ऐसी स्थिति में सामान्य रद्दीकरण नियम नहीं, TDR के नियम लागू होते हैं — और पूरा किराया वापस मिल सकता है।
श्रेणी चुनिए
निश्चित शुल्क श्रेणी पर निर्भर करता है — स्लीपर में ₹120, एसी 3-टियर में ₹180 और जीएसटी।
टिकट की स्थिति बताइए
कन्फर्म, RAC, वेटिंग या तत्काल — नियम पूरी तरह बदल जाता है।
कुल किराया भरिए
जो रकम आपने चुकाई थी, सभी यात्रियों को मिलाकर।
बचा हुआ समय डालिए
प्रस्थान में कितने घंटे बाक़ी हैं — 72, 24 और 8 घंटे पर स्लैब बदलता है।
रिफंड देखिए
कटौती और वापसी दोनों जीएसटी सहित दिखती हैं।
कन्फर्म टिकट पर यह इस बात से तय होता है कि आप कितनी जल्दी रद्द कर रहे हैं। प्रस्थान से 72 घंटे या उससे पहले केवल श्रेणी का निश्चित शुल्क कटता है — स्लीपर में ₹120, एसी 3-टियर में ₹180 और जीएसटी। 72 से 24 घंटे के बीच किराये का 25%, और 24 से 8 घंटे के बीच 50%। प्रस्थान से 8 घंटे के भीतर कन्फर्म टिकट पर कुछ भी वापस नहीं मिलता।
कन्फर्म तत्काल टिकट पर नहीं। यह तत्काल की सबसे महँगी शर्त है और अक्सर लोग इसे बाद में जान पाते हैं। हाँ, यदि तत्काल टिकट RAC या वेटिंग में ही रह गई, तो सामान्य क्लर्केज काटकर बाक़ी रकम वापस मिल जाती है।
सिर्फ़ क्लर्केज — प्रति यात्री ₹60 और उस पर 5% जीएसटी, यानी लगभग ₹63। शर्त यह है कि रद्दीकरण निर्धारित प्रस्थान से कम से कम आधे घंटे पहले हो। पूरी तरह वेटिंग रह गई ई-टिकट चार्ट बनते ही अपने आप रद्द हो जाती है और पैसा उसी खाते में लौट आता है — इसके लिए कुछ करने की ज़रूरत नहीं।
एसी श्रेणियों पर हाँ, 5%। स्लीपर और सेकंड सिटिंग पर नहीं। क्लर्केज पर भी जीएसटी लगता है। यह कैलकुलेटर जीएसटी जोड़कर ही रकम दिखाता है, इसलिए जो आँकड़ा दिखता है वही असल में कटता है।
तब यह सामान्य रद्दीकरण नहीं रहता। ट्रेन रद्द होने पर पूरा किराया वापस मिलता है, और तीन घंटे से अधिक देरी होने पर यदि आप यात्रा नहीं करते तो TDR भरकर पूरा रिफंड माँगा जा सकता है। ऐसी स्थितियों के लिए TDR वाला टूल देखिए, यह कैलकुलेटर नहीं।
संपादकीय भरोसा पैनल
समीक्षक
अंतिम समीक्षा
31 जुलाई 2026
सामग्री अद्यतन
Auto-updated on Jun 28, 2026
दायरा: गणना 1 अप्रैल 2026 से लागू रद्दीकरण नियमों पर आधारित है, जिसमें एसी श्रेणियों के शुल्क और क्लर्केज पर 5% जीएसटी शामिल है। ट्रेन रद्द होने या तीन घंटे से अधिक देरी की स्थिति अलग है और उसके लिए TDR वाला नियम लागू होता है।
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